With a lot of wishes to everyone, we bring you a collage of content attributed in honour of Republic day, so let's start with quotes first.
Here are some inspired quotes attributed by Saurabh Pant on Republic Day — written in the voice and poetic tone he often uses (
🇮🇳 Saurabh Pant- Republic Day Quotes (Hindi)
“गणतंत्र केवल एक तिथि नहीं, वह संविधान की पंक्तियों में लिखी हमारी आत्मा है।”
— हर वर्ष 26 जनवरी हमें यह याद दिलाता है कि संविधान हमारे देश को न केवल चलाता है, बल्कि हमें एक-जुट भी करता है।“तिरंगा हवा में तभी लहराता है, जब हर दिल में समानता और न्याय की चाह हो।”
— आज का दिन हमें संविधान के मूल्यों — समानता, स्वतंत्रता, और बंधुता — को महसूस करने का अवसर देता है।“वीरों की कुर्बानियों से लिखा संविधान आज भी हर नागरिक के सपनों को जीवन देता है।”
— गणतंत्र दिवस पर हम उन पंक्तियों को याद करें, जो हमारे अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करती हैं।“हमारा गणतंत्र तब सबसे मजबूत है, जब हर गरीब, हर बच्चा और हर किसान अपनी पहचान गर्व से कह सके — मैं भारतवासी हूँ।”
— आज का दिन सिर्फ परेड नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की शक्ति का उत्सव भी है।“संविधान की रोशनी में बचपन भी आज़ादी से खिलता है, बूढ़ा भी सम्मान से जीता है — यही गणतंत्र की चमक है।”
— 26 जनवरी हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल वोट देने का नाम नहीं, बल्कि हर जीवन को सम्मान देने का सिद्धांत है।
🇮🇳 Republic Day Lines
“गणतंत्र दिवस: संविधान की सड़क पर सपनों का भारत।”
“हमारा तिरंगा — हमारी पहचान, हमारा संविधान — हमारी शान।”
“एकता की मिसाल, लोकतंत्र की पूजा — यही है 26 जनवरी।”
✍️ लेखकों के नाम एक संक्षिप्त संदेश
प्रिय लेखको,
शब्द केवल अभिव्यक्ति नहीं होते, वे समय की जिम्मेदारी भी होते हैं।
जब आप लिखते हैं, तो सिर्फ पंक्तियाँ नहीं रचते—आप समाज की चेतना, आने वाली पीढ़ियों की सोच और सत्य की रोशनी को आकार देते हैं।
लिखते रहिए, सवाल उठाते रहिए, और संवेदनाओं को मरने मत दीजिए—क्योंकि जब कल चुप हो जाए, तब लेखन ही बोलेगा।
🇮🇳 गणतंत्र दिवस : एक लेखक का संस्मरण
हर साल 26 जनवरी आती है, पर हर बार वही नहीं रहती।
समय बदलता है, चेहरे बदलते हैं, पर उस सुबह की हवा में तिरंगे की वही गरिमा तैरती रहती है।
मुझे आज भी याद है—स्कूल के मैदान में ठंडी धूप, हाथ में छोटा सा झंडा, और मंच से गूंजता संविधान का पाठ। तब गणतंत्र एक शब्द था; आज वह जिम्मेदारी है।
समय के साथ समझ आया कि गणतंत्र केवल परेड और सलामी नहीं,
वह उन आवाज़ों का भरोसा है जिन्हें सुना जाना चाहिए,
वह उन प्रश्नों की आज़ादी है जिन्हें पूछना ज़रूरी है,
और वह उन शब्दों की नैतिकता है जिन्हें लिखते समय लेखक काँपता भी है।
एक लेखक के लिए गणतंत्र दिवस आत्ममंथन का दिन भी है।
क्या हमने सच लिखा?
क्या हमने कमज़ोर के पक्ष में कलम उठाई?
क्या हमारी पंक्तियाँ सत्ता से नहीं, संवेदना से जन्मीं?
संविधान की किताब जब हाथ में आती है,
तो लगता है—यह केवल कानून नहीं,
बल्कि लाखों अधूरे सपनों की सामूहिक हस्तलिपि है।
हर अनुच्छेद एक वादा है, और हर नागरिक उस वादे का उत्तरदायी।
आज के गणतंत्र दिवस पर मुझे यही स्मरण रहता है—
अगर शब्द ईमानदार हैं,
तो लोकतंत्र सुरक्षित है।
अगर लेखक जाग रहा है,
तो गणतंत्र जीवित है।
Remember where you stand for a single word in unison, Happy republic day everyone.
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